बस्तर से लेकर सरगुजा तक परिवहन कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना’ ने अपने सफलता का एक वर्ष पूरा कर लिया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के जरिए राज्य के लगभग 850 दुर्गम गांवों तक पहली बार नियमित बस सेवा पहुंची है। जिन इलाकों को पहले बेहद दुर्गम माना जाता था, वहां अब आसानी से बसें पहुंच रही हैं। पिछले एक साल में इन बसों ने लगभग 24 लाख किलोमीटर का लंबा सफर तय किया है। वर्तमान में 13 जिलों के 106 मार्गों पर 107 बसें लगातार सरपट दौड़ रही हैं, जिससे न केवल लोगों का अस्पताल और जिला मुख्यालय पहुंचना आसान हुआ है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिली है।
🛣️ दूर होंगे सफर के फासले: दूसरे चरण में 8 नए जिलों के 4,368 गांवों को जोड़ने का लक्ष्य
साय सरकार की योजना के अगले चरण में 8 नए जिलों के अनुसूचित क्षेत्रों तक इस बस सेवा का और विस्तार किया जाएगा। शासन ने कुल 4,368 बस सुविधा विहीन गांवों को इस नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य के अंतिम छोर पर बसे हर गांव तक सुरक्षित और सुलभ परिवहन पहुंचाना उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिसे पूरी प्रतिबद्धता के साथ पूरा किया जा रहा है। योजना के तहत अब सुदूर गांवों के नागरिकों को भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंचने का समान अवसर मिल रहा है।
📱 जीपीएस (GPS) से होती है मॉनिटरिंग, विशेष वर्गों के लिए किराए में शत-प्रतिशत छूट
योजना में पूरी तरह पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। प्रत्येक बस में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) लगाया गया है, जिससे कंट्रोल रूम के जरिए बसों की लाइव मॉनिटरिंग की जाती है। इसके अलावा, सामाजिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए दृष्टिबाधित, दिव्यांगजनों, 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों और एचआईवी पीड़ितों को सहायक सहित किराए में शत-प्रतिशत छूट दी जा रही है, जबकि नक्सल प्रभावित व्यक्तियों को 50 प्रतिशत की छूट मिलती है।
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