अल्मोड़ा के सल्ट में 8 महीने बाद दहशत का अंत: 4 लोगों का शिकार करने वाला बाघ ट्रेंकुलाइज

उत्तराखण्ड

अल्मोड़ा (उत्तराखंड): जिले के सल्ट विकासखंड अंतर्गत भोनखाल और तड़मगांव क्षेत्र में पिछले करीब आठ महीनों से आतंक का पर्याय बना नर बाघ आखिरकार वन विभाग के रेस्क्यू अभियान में पकड़ा गया।

लगातार सक्रिय इस बाघ को वन विभाग की विशेषज्ञ टीम ने बुधवार रात सटीक रणनीति के तहत ट्रेंकुलाइज (बेहोश) कर सुरक्षित कब्जे में ले लिया। इलाके में बाघ के लगातार हमलों में अब तक चार बेकसूर ग्रामीणों की दर्दनाक मौत हो चुकी थी। इस खूंखार बाघ के पकड़े जाने की सूचना मिलते ही समूचे पर्वतीय क्षेत्र के ग्रामीणों ने भारी राहत की सांस ली है।

🌲 आठ महीने से खौफ के साए में कट रही थी जिंदगी: अकेले जंगल जाने से डर रहे थे ग्रामीण

ग्रामीणों में भय का माहौल और वन विभाग की निगरानी:

  • लगातार गतिविधियां: सल्ट के भोनखाल और तड़मगांव इलाके में पिछले 8 महीनों से बाघ की चहलकदमी और हमलों ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया था।

  • दैनिक जीवन प्रभावित: लोग अपने मवेशियों के लिए चारा जुटाने या जंगल के रास्ते अकेले आने-जाने से पूरी तरह कतराने लगे थे।

  • निगरानी दल तैनात: वन विभाग ने क्षेत्र में कई रणनीतिक स्थानों पर पिंजरे, ट्रैप कैमरे और विशेषज्ञ गश्ती दल तैनात किए हुए थे, जो बाघ के पगमार्क और मूवमेंट पर लगातार नजर रखे हुए थे।

💔 19 वर्षीय नवविवाहिता को बनाया था शिकार: ग्रामीणों का फूटा था भारी आक्रोश

हमले की हालिया घटना और जनाक्रोश:

  • अगस्त की हृदयविदारक घटना: बाघ के जानलेवा हमलों की सबसे ताजा वारदात अगस्त माह की शुरुआत में दर्ज की गई थी, जब तड़मगांव क्षेत्र में एक 19 साल की नवविवाहिता को बाघ ने अपना निवाला बना लिया था।

  • प्रशासन पर दबाव: इस हृदयविदारक घटना के बाद समूचे क्षेत्र के ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा था और उन्होंने प्रशासन से आदमखोर बाघ को अविलंब पकड़ने या गोली मारने की मांग को लेकर कड़ा रुख अपनाया था।

🎯 शिकार के पास लौटते ही चला ट्रेंकुलाइजर: बुधवार रात 8:45 बजे मिली बड़ी सफलता

रेस्क्यू ऑपरेशन का घटनाक्रम:

  • सटीक योजना: बुधवार रात करीब 8:45 बजे वन विभाग के कुशल निशानेबाजों और वन्यजीव विशेषज्ञों को सफलता हाथ लगी।

  • घात लगाकर कार्रवाई: बाघ एक स्थानीय जानवर का शिकार करने के उपरांत दोबारा अपने शिकार को खाने के लिए मौके पर लौटा।

  • सटीक निशाना: पहले से मचान और सुरक्षित दूरी पर घात लगाकर बैठी वन विभाग की टीम ने अनुकूल मौका देखते ही बाघ पर सटीक ट्रेंकुलाइजर डार्ट दाग दिया, जिससे वह कुछ ही मिनटों में अचेत हो गया।

🏥 कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के ढेला रेस्क्यू सेंटर में शिफ्ट: स्वास्थ्य परीक्षण में बाघ फिट

रेस्क्यू सेंटर में देखभाल और मेडिकल रिपोर्ट:

  • उच्चाधिकारियों की अनुमति: मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (Chief Wildlife Warden) से विधिक अनुमति प्राप्त करने के बाद पकड़े गए नर बाघ को कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की ढेला रेंज स्थित आधुनिक रेस्क्यू सेंटर लाया गया।

  • डिप्टी डायरेक्टर का बयान: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक (डिप्टी डायरेक्टर) राहुल मिश्रा ने पुष्टि की कि सल्ट के तड़मगांव से रेस्क्यू किया गया नर बाघ सुबह रेस्क्यू सेंटर पहुंच गया। प्राथमिक पशु चिकित्सीय जांच में बाघ पूरी तरह स्वस्थ और चोट-मुक्त पाया गया है।

🔬 IVRI बरेली भेजी जा रही विसरा जांच: रिपोर्ट से होगी आधिकारिक पुष्टि

वैज्ञानिक पुष्टि और विधिक प्रक्रिया:

  • डीएनए और विसरा मिलान: वन विभाग की टीम केवल पकड़ने भर से यह मानकर नहीं चल रही है कि यही वही बाघ है जिसने चारों मानव शिकार किए थे।

  • आईवीआरआई में जांच: बाघ का विसरा और डीएनए सैंपल जांच हेतु भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), बरेली भेजा जा रहा है।

  • अंतिम निर्णय: लैब से आने वाली वैज्ञानिक रिपोर्ट और पीड़ितों के शरीर से मिले साक्ष्यों के मिलान के बाद ही बाघ को हमेशा के लिए चिड़ियाघर भेजने अथवा अन्य फैसले पर विचार किया जाएगा।

🛡️ तड़मगांव में राहत का माहौल: एहतियातन वन विभाग की गश्त जारी

वर्तमान सुरक्षा स्थिति:

  • गांवों में लौटी शांति: बाघ के पकड़े जाने के उपरांत तड़मगांव, भोनखाल और सीमावर्ती बस्तियों में पसरा सन्नाटा दूर हुआ है और जनजीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है।

  • अलर्ट मोड पर टीम: वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा के मद्देनजर क्षेत्र से निगरानी तुरंत नहीं हटाई जाएगी; अग्रिम आदेशों तक वन कर्मियों की गश्त जारी रहेगी ताकि ग्रामीण पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर सकें।

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