नई दिल्ली / भोपाल: हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत पावन और आस्था का प्रतीक ‘हरियाली तीज’ का पर्व इस वर्ष 15 अगस्त को संपूर्ण देश में अत्यंत हर्षोल्लास और भक्ति भाव के साथ मनाया जाएगा।
यह पर्व प्रकृति के नवसृजन, सौंदर्य और दांपत्य जीवन के अटूट प्रेम का जीवंत प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सुहाग की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और भगवान शिव व माता पार्वती के पूर्ण आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए हरियाली तीज का व्रत सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस पावन अवसर पर बनने वाले विशिष्ट खगोलीय संयोग पूजा के फल और सकारात्मक प्रभाव को कई गुना बढ़ा देते हैं। सही समय व विधि-विधान से की गई आराधना से पारिवारिक कलह दूर होकर गृहस्थ जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।
✨ वर्ष 2026 में बन रहे हैं दुर्लभ संयोग: रवि योग, सिद्ध योग और साध्य योग का महासंगम
वर्ष 2026 में हरियाली तीज का पर्व शनिवार के पावन दिन पड़ने के साथ-साथ कई अत्यंत दुर्लभ और शुभ योग लेकर आ रहा है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस दिन सूर्य देव के विशेष प्रभाव से अत्यंत बलशाली ‘रवि योग’ का निर्माण हो रहा है, जो सभी प्रकार के वास्तु दोषों और नकारात्मक प्रभावों को समाप्त करने में सक्षम है। इस शुभ अवधि में की गई पूजा व मनोकामनाएं शीघ्र फलित होती हैं। इसके साथ ही इस दिन ‘सिद्ध योग’ और ‘साध्य योग’ का दुर्लभ संगम भी बन रहा है, जिसे तंत्र-मंत्र साधना, जप-तप और धार्मिक अनुष्ठानों की निर्विघ्न सफलता के लिए सर्वोत्तम माना गया है। साथ ही उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का शुभ प्रभाव दांपत्य संबंधों में मधुरता घोलने और आपसी मनमुटाव दूर करने में विशेष फलदायी सिद्ध होगा।
🌸 सिंधारा परंपरा, झूला और मेहंदी: महिलाओं के तन-मन में नई ऊर्जा का संचार करता है पर्व
वर्षा ऋतु की रिमझिम फुहारों के बीच चारों ओर छाई हरियाली और इस दिन बनने वाले विशिष्ट संयोग महिलाओं के जीवन में नई उमंग और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
इस पावन अवसर पर नवविवाहित और सुहागिन महिलाएं अपने मायके (पीहर) से आया हुआ पारंपरिक ‘सिंधारा’ आदरपूर्वक स्वीकार करती हैं। इस सिंधारे में सुंदर वस्त्र, 16 श्रृंगार की सामग्री, सुहाग पिटारी, फल और पारंपरिक मिठाइयां (विशेषकर घेवर) सम्मिलित होती हैं। इस दिन सोलह श्रृंगार कर हाथों में मेहंदी रचाना, बागों में झूला झूलना और तीज के पारंपरिक लोकगीत गाना अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही सौभाग्य सामग्री का दान दूसरी सुहागिन महिलाओं को करना महान पुण्य का कार्य माना गया है।
🔱 भगवान शिव और माता पार्वती का अखंड आशीर्वाद, दांपत्य जीवन के समस्त कष्ट होंगे दूर
हरियाली तीज के पावन दिन बनने वाले ये सभी शुभ संयोग पारिवारिक और वैवाहिक जीवन में असीम खुशहाली का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
शास्त्रों में वर्णित विधि-विधान के अनुसार, इस दिन मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाकर विधिवत पूजन, हरियाली तीज व्रत कथा का श्रवण और आरती करनी चाहिए। जो सुहागिन महिलाएं निष्ठापूर्वक निर्जला या फलाहार व्रत रखकर देवाधिदेव महादेव और मां गौरी का ध्यान करती हैं, उनके वैवाहिक जीवन की समस्त बाधाएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं और परिवार पर भोलेनाथ की असीम अनुकंपा सदैव बनी रहती है।
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