दुनिया के सबसे ऊंचे चिनाब रेल ब्रिज पर बादलों को चीरती गुजरी वंदे भारत, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शेयर किया खूबसूरत वीडियो

हिमांचल प्रदेश

श्रीनगर/रियासी: जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बना विश्व प्रसिद्ध चिनाब रेल ब्रिज (Chenab Railway Bridge) अपनी अलौकिक खूबसूरती और इंजीनियरिंग के बेजोड़ करिश्मे से हर किसी को मंत्रमुग्ध कर रहा है।

हाल ही में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट से इस भव्य ब्रिज के ऊपर से गुजरती वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन का एक बेहद मनमोहक और अद्भुत वीडियो साझा किया है। मानसून के मौसम में घने बादलों, धुंध और हरियाली से ढकी खूबसूरत वादियों के बीच गर्व से दौड़ती ट्रेन का यह नजारा सोशल मीडिया पर देशवासियों द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है।

🚅 भारतीय इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना, कश्मीर घाटी को पूरे देश से जोड़ रहा है यह ऐतिहासिक रेल मार्ग

चिनाब रेल ब्रिज को भारतीय सिविल इंजीनियरिंग का एक अद्भुत और अकल्पनीय नमूना माना जाता है।

यह विशालकाय रेल ब्रिज हिमालय की कठिन और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों को पार करते हुए कश्मीर घाटी को पूरे भारतवर्ष के साथ सीधे रेल नेटवर्क से जोड़ने में क्रांतिकारी भूमिका निभा रहा है। इस ऐतिहासिक रेल कनेक्टिविटी के शुरू होने से जम्मू-कश्मीर में पर्यटन, स्थानीय व्यापार, कृषि तथा आम जनता की आवाजाही को एक नई और अभूतपूर्व रफ्तार मिली है। इसके साथ ही सेमी-हाई स्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस के नियमित संचालन से केंद्र शासित प्रदेश में आधुनिक परिवहन और आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खुले हैं।

🗼 पेरिस के एफिल टॉवर से भी 35 मीटर ऊंचा है चिनाब ब्रिज, 359 मीटर की ऊंचाई पर है निर्मित

दुनिया का सबसे ऊंचा यह रेलवे मेहराबदार (आर्च) ब्रिज चिनाब नदी के तल से 359 मीटर (1,178 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है।

यह फ्रांस की राजधानी पेरिस के विश्वप्रसिद्ध एफिल टॉवर (Eiffel Tower) से भी करीब 35 मीटर अधिक ऊंचा है। जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित बक्कल और कौरी गांवों के बीच बना यह भव्य पुल कटरा से बनिहाल के रेल मार्ग को जोड़ने वाली एक अति-महत्वपूर्ण कड़ी है। लगभग 35,000 करोड़ रुपये की विशाल बजट वाली ‘उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेलवे लिंक’ (USBRL) महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय परियोजना का यह मुख्य आकर्षण है।

🛡️ 260 किमी/घंटे की हवा और तेज भूकंप को झेलने में सक्षम, 2003 में मिली थी प्रोजेक्ट को मंजूरी

इस महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय प्रोजेक्ट को वर्ष 2003 में केंद्र सरकार द्वारा आधिकारिक स्वीकृति प्रदान की गई थी।

हालांकि, दुर्गम इलाके में पुल की मजबूती, संरचनात्मक स्थिरता और यात्रियों की सुरक्षा संबंधी तकनीकी चिंताओं के व्यापक अध्ययन के चलते इसके निर्माण कार्य में लंबा समय लगा। वर्ष 2008 में इस मेगा ब्रिज के निर्माण का ठेका जारी किया गया था। अत्याधुनिक तकनीक से निर्मित यह ब्रिज अत्यधिक तेज हवाओं (260 किमी प्रति घंटे की रफ्तार), भयानक भूकंपीय झटकों, भीषण ठंड और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का आसानी से सामना करने में पूरी तरह सक्षम है।

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