हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच के समक्ष एक याचिकाकर्ता ने चौंकाने वाला व्यवहार किया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कागज फेंक दिए और अपशब्दों का प्रयोग किया। इस घटना के बाद सुरक्षाकर्मियों ने उसे हिरासत में लेकर कोर्टरूम से बाहर निकाल दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यक्ति के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम न उठाने का निर्णय लिया है। कोर्ट का मानना है कि ऐसी घटनाओं को अक्सर सस्ती लोकप्रियता (Cheap Publicity) पाने के लिए अंजाम दिया जाता है, और यदि कोर्ट इस पर सख्त कार्रवाई करती है, तो संबंधित व्यक्ति अपने मकसद में कामयाब हो जाएगा। रजिस्ट्रार द्वारा मामले की जानकारी मिलने के बाद, अधिकारियों ने आगे कोई कानूनी कार्रवाई न करने का निर्देश दिया।
📢 क्या है पूरा मामला?
घटना शुक्रवार की है, जब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता ने हंगामा खड़ा कर दिया। याचिकाकर्ता खुद ही अपना केस लड़ रहा था। सुनवाई के दौरान, उसने खुद को “संप्रभु” (Sovereign) बताया और अचानक केस की फाइल के कागज हवा में उछाल दिए। याचिकाकर्ता के इस व्यवहार से कोर्टरूम में कुछ देर के लिए सन्नाटा पसर गया। उस समय जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच सुनवाई कर रही थी। सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति को संभालते हुए तुरंत उसे कोर्टरूम से बाहर निकाल दिया।
🛑 जज को आदेश देने का दुस्साहस
सुनवाई शुरू होते ही याचिकाकर्ता ने जज से कहा, “योर ऑनर, मैं आपको लखनऊ के एसीपी (ACP) के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश देता हूं।” यह सुनकर जस्टिस के.वी. विश्वनाथन ने हैरानी जताते हुए पूछा, “क्या आप मुझे आदेश दे रहे हैं?” इस पर याचिकाकर्ता ने जवाब दिया, “मेरी तरफ से बस इतना ही, सब कुछ रिकॉर्ड में है।” इसके तुरंत बाद उसने केस फाइल हवा में उछाल दी और गाली-गलौज करना शुरू कर दिया। सुरक्षाकर्मियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में लिया और कोर्ट परिसर से बाहर ले गए।
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