गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले से होकर गुजरने वाला निर्माणाधीन नेशनल हाईवे-45 (NH-45) पहली ही बारिश में अपनी गुणवत्ता की पोल खोल रहा है। जबलपुर से रायपुर को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग में कारीआम से बेलपत-जोगीसार के बीच जगह-जगह नई डामर सड़क में लंबी-लंबी दरारें पड़ गई हैं। सड़क किनारे डाले गए मुरुम और मिट्टी बारिश में बह जाने से सड़क के किनारे चौड़े गैप बन गए हैं, जो राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बने हुए हैं।
⚠️ बड़ी दुर्घटनाओं को दे रही है दावत
यह नेशनल हाईवे अंतर्राज्यीय परिवहन का मुख्य मार्ग है, जहाँ से हर दिन भारी संख्या में मालवाहक ट्रक, यात्री बसें और निजी वाहन गुजरते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों और मजबूती का ध्यान नहीं रखा गया। पुलियों के पास सड़क के धंसने और साइड सोल्डर के बह जाने से स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि तत्काल तकनीकी सुधार नहीं किया गया, तो आगामी मानसून के दौरान सड़क का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो सकता है।
🔍 ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
सड़क की बदहाली को लेकर क्षेत्रवासियों में गहरा आक्रोश है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरी परियोजना की तकनीकी जांच कराई जाए और गुणवत्ता से समझौता करने वाली निर्माण एजेंसी पर कड़ी कार्रवाई हो। लोगों का मानना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली यह सड़क टिकाऊ होनी चाहिए थी, लेकिन लापरवाही के कारण यह समय से पहले ही जर्जर हो गई है।
📢 अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल
भले ही प्रशासन और निर्माण एजेंसी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर लोग इसे बड़ी प्रशासनिक लापरवाही मान रहे हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में किसी भी बड़ी दुर्घटना से बचने के लिए प्रशासन को तुरंत संज्ञान लेना होगा और दोषियों को जवाबदेह बनाना होगा।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad
