Palamu Mystery Disease: सिक्का गांव में एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत, 12 दिन बाद भी बीमारी का रहस्य बरकरार

झारखण्ड

पलामू जिले के पड़वा प्रखंड स्थित सिक्का गांव इन दिनों गहरे शोक और दहशत में है। यहाँ एक ही परिवार के 5 लोगों की रहस्यमय बीमारी से मौत हो गई है। घटना के 12 दिन बीत जाने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन यह बताने में असमर्थ है कि आखिर मौत की असल वजह क्या है। कुलदीप मेहता, उनकी दोनों बेटियों, बहू और बेटे की मौत के बाद से पूरा गांव सदमे में है।

🩺 पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लेटलतीफी, विसरा जांच लटकी

मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (MMCH) में हुए पोस्टमार्टम की रिपोर्ट 12 दिन बाद भी अधूरी है। डॉक्टरों की टीम के हस्ताक्षर न होने और रिपोर्ट तैयार न होने के कारण विसरा जांच के लिए नहीं भेजा जा सका है। डॉक्टरों ने ‘ड्रॉप्सी’ (Dropsy) बीमारी की आशंका जताई है, जिसके लक्षण मरीजों में सूजन और अकड़न के रूप में दिखे थे। हालांकि, अंतिम पुष्टि जांच रिपोर्ट के बाद ही हो पाएगी।

🏚️ गांव में पसरा सन्नाटा, लोग घरों में दुबकने को मजबूर

सिक्का गांव की 1500 की आबादी अब भारी खौफ में जी रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, शाम होते ही गांव की गलियां सुनसान हो जाती हैं और लोग घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस सहायता या जागरूकता अभियान नहीं चलाया गया है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने मृतकों के घर से भोजन के सैंपल और पड़ोसियों के ब्लड सैंपल लिए हैं, जिनकी रिपोर्ट का अभी भी इंतजार है।

🚫 इलाज के बजाय झाड़-फूंक का सहारा बना जानलेवा

सबसे दुखद पहलू यह है कि परिवार ने शुरुआती लक्षणों के बाद आधुनिक चिकित्सा के बजाय झाड़-फूंक का सहारा लिया। चैनपुर और लेस्लीगंज जैसे इलाकों में वे करीब 5 दिनों तक तांत्रिकों के चक्कर काटते रहे, जिससे मरीजों की स्थिति और बिगड़ गई। बाद में स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें रेस्क्यू कर रिम्स (RIMS) भेजा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। वर्तमान में परिवार का केवल एक सदस्य सुरक्षित बचा है, जो बेंगलुरु से वापस लौट आया है।

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