जम्मू: अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) के पास भारतीय क्षेत्र के भीतर पाकिस्तानी मोबाइल नेटवर्क के सिग्नल मिलने से सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं बढ़ गई हैं। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, जम्मू सेक्टर में सीमा से काफी अंदर तक पाकिस्तान के 2जी और 4जी नेटवर्क की पहुंच दर्ज की गई है। एजेंसियां इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में देख रही हैं।
🕵️ क्या है सुरक्षा एजेंसियों को डर?
सुरक्षा जानकारों का मानना है कि घुसपैठ करने वाले आतंकवादी और उनके ओवरग्राउंड वर्कर (OGW) भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बचने के लिए पाकिस्तानी मोबाइल नेटवर्क का सहारा ले सकते हैं। आशंका है कि इन सिग्नलों का इस्तेमाल आपस में संपर्क करने और आतंकी गतिविधियों का समन्वय करने के लिए किया जा सकता है। विशेष रूप से ‘YSMS’ जैसी एन्क्रिप्टेड तकनीक के जरिए ये नेटवर्क बिना किसी डिजिटल निशान के संचार को आसान बना रहे हैं।
🛡️ निगरानी और तकनीकी जांच जारी
सुरक्षा एजेंसियों ने सीमा से सटे इलाकों में इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस को और अधिक सख्त कर दिया है। तकनीकी विशेषज्ञों की टीमें यह जांच कर रही हैं कि पाकिस्तानी मोबाइल नेटवर्क (जैसे जैज, जोंग, टेलीनॉर आदि) भारतीय सीमा के भीतर इतनी गहराई तक कैसे पहुंच रहे हैं। सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है।
📍 प्रभावित सीमावर्ती जिले
पाकिस्तानी मोबाइल नेटवर्क के सिग्नल मुख्य रूप से कठुआ, राजौरी, पुंछ और सांबा जैसे संवेदनशील सीमावर्ती जिलों में देखे गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इन नेटवर्क के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए पूरे सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाया जा रहा है। यदि इन सिग्नलों का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों में होने के ठोस प्रमाण मिलते हैं, तो और भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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