Calcutta High Court: आरोपी की कमर में रस्सी बांधकर घुमाना मानवाधिकारों का उल्लंघन; कोर्ट ने पुलिस को लगाई फटकार

देश

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में हाल के दिनों में गिरफ्तार आरोपियों को रस्सी से बांधकर सड़क पर घुमाने की कई तस्वीरें सामने आई हैं। इन घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी आरोपी की कमर में रस्सी बांधकर परेड कराना कानूनी रूप से कतई उचित नहीं है और यह मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।

👮 जहांगीर खान केस और कोर्ट का रुख

यह मामला फलता के तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान से जुड़ा है। जहांगीर खान, जिसे ‘पुष्पा’ के नाम से भी जाना जाता है, पर कई मामले दर्ज हैं। गिरफ्तारी के बाद उनकी पत्नी रेजिना बीबी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान जब कमर में रस्सी बांधकर घुमाने का मामला उठा, तो जज ने नाराजगी जाहिर की। सरकारी वकील ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि पुलिस से रिपोर्ट मिलने के बाद ही इस पर विस्तृत जवाब दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 1 जुलाई को होगी।

🗣️ तृणमूल विधायक कुणाल घोष की प्रतिक्रिया

इस पूरे घटनाक्रम पर बेलेघाटा से तृणमूल विधायक कुणाल घोष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करना चाहिए, लेकिन किसी को भी किसी पर दाग लगाने, कपड़े उतारने या कमर में रस्सी बांधकर टॉर्चर करने का अधिकार नहीं है। कुणाल घोष ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध और जबरदस्ती का प्रदर्शन बताया है।

📜 कानूनी दृष्टिकोण

कोर्ट की यह टिप्पणी उन प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर बड़ा सवाल उठाती है जहाँ आरोपी की गरिमा को दरकिनार कर दिया जाता है। न्यायिक व्यवस्था का यह स्पष्ट संदेश है कि चाहे आरोपी पर कितने ही गंभीर आरोप क्यों न हों, कानून उसे मानवीय गरिमा के साथ पेश किए जाने का अधिकार देता है। राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन के लिए अब इस निर्देश का पालन करना अनिवार्य होगा।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry