अंबिकापुर: भागदौड़ भरी जिंदगी में विटामिन B12 और D3 की कमी एक आम समस्या बनती जा रही है। इस बीच, सरगुजा की पारंपरिक खाद्य संस्कृति में शामिल ‘बोथल बासी’ स्वास्थ्य के लिहाज से एक वरदान बनकर उभर रहा है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी खाया जाने वाला यह व्यंजन न केवल सस्ता है, बल्कि पोषण और पाचन (गट हेल्थ) के लिए भी अत्यंत लाभकारी माना जा रहा है।
🌾 क्या है बोथल बासी और इसे कैसे खाया जाता है?
स्थानीय ग्रामीण संजय कुमार बताते हैं कि बोथल बासी सरगुजा के हर घर की रसोई का हिस्सा है। इसे तैयार करने के लिए पके हुए चावल (भात) को रातभर पानी में भिगोकर रखा जाता है। सुबह इसे नमक, मिर्च, अचार या सब्जी के साथ परोसा जाता है। यह सरगुजा की एक ऐसी खाद्य संस्कृति है जिसे लोग बचपन से अपनाते आ रहे हैं।
📊 डायटीशियन की राय: क्यों फायदेमंद है बोथल बासी?
डायटीशियन सुमन सिंह के अनुसार, बासी चावल और दही का संयोजन गट हेल्थ (पाचन तंत्र) के लिए किसी टॉनिक से कम नहीं है। उन्होंने बताया:
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प्रोबायोटिक गुण: इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स पाचन को बेहतर बनाते हैं, जिससे लीवर की कार्यक्षमता सुधरती है और त्वचा व बालों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
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पोषक तत्वों का भंडार: यदि इसमें ताजा दही या छाछ, जीरा, पुदीना और मिर्च मिला दी जाए, तो यह प्रोटीन, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स का बेहतरीन स्रोत बन जाता है।
👶 बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष लाभकारी
विशेषज्ञों का मानना है कि फास्ट फूड के दौर में बच्चों और बुजुर्गों के लिए बोथल बासी एक पौष्टिक विकल्प है। यह बुजुर्गों में पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करता है और बच्चों को जरूरी ऊर्जा प्रदान करता है। यह भोजन शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखने में भी मदद करता है।
⚠️ इन बातों का रखें ध्यान
यद्यपि बोथल बासी स्वास्थ्यवर्धक है, फिर भी कुछ सावधानियां जरूरी हैं:
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डायबिटीज और मोटापा: जो लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, वे सामान्य चावल के स्थान पर कोदो के चावल का उपयोग कर सकते हैं।
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सीमित मात्रा: मोटापे से ग्रसित लोगों को इसके सेवन की मात्रा पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
संतुलित आहार के रूप में बोथल बासी न केवल हमारी परंपरा को जीवित रखता है, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में भी एक कदम है।
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