स्विट्जरलैंड: अमेरिका और ईरान के बीच दशकों से चला आ रहा तनाव अब कम होता दिख रहा है। लेबनान में इजराइल-हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम लागू होने के बाद, दोनों देशों के बीच स्थायी शांति समझौते की उम्मीदें बढ़ गई हैं। अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची इस वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड पहुँच रहे हैं, जहाँ वे 14 पॉइंट्स वाले MoU के आधार पर अंतिम समझौते की रूपरेखा तैयार करेंगे।
⏳ 60 दिनों का ‘पीस प्लान’
दोनों देशों ने हाल ही में एक 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य अगले 60 दिनों के भीतर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अन्य क्षेत्रीय विवादों का स्थायी समाधान खोजना है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर पहले ही स्विट्जरलैंड में मौजूद हैं, जो इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं।
🗂️ मुख्य चर्चा के विषय और ईरान को मिलने वाली राहत
स्विट्जरलैंड वार्ता में निम्नलिखित बिंदुओं पर गहन चर्चा होगी:
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परमाणु कार्यक्रम: ईरान की परमाणु गतिविधियों पर नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय निगरानी।
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आर्थिक राहत: ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील, जमी हुई संपत्तियों की बहाली और तेल निर्यात की छूट।
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क्षेत्रीय सुरक्षा: लेबनान संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही। समझौते के तहत ईरान को करीब 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण फंड और अन्य आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है, बदले में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर टोल न लगाने का आश्वासन दिया है।
🌍 दुनिया की नजरें अगले 60 दिनों पर
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते का बचाव करते हुए कहा है कि यह अमेरिका की मजबूती को दर्शाता है। हालांकि, कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस अस्थायी समझौते को स्थायी शांति में बदलना एक बड़ी चुनौती होगी। आगामी 60 दिन वैश्विक राजनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इसी दौरान तय होगा कि क्या ये दोनों देश वास्तव में एक नई शांतिपूर्ण शुरुआत कर पाएंगे।
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