भोपाल: मध्य प्रदेश की सियासत में बयानों का स्तर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के बीच जारी जुबानी जंग अब व्यक्तिगत टिप्पणियों तक पहुँच गई है। जीतू पटवारी ने हाल ही में मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए ‘नौसिखिया’ और ‘चप्पू’ वाले बयानों पर तल्ख प्रतिक्रिया दी है।
🥊 ‘चप्पू’ की उपयोगिता समझें मुख्यमंत्री
पत्रकारों से चर्चा करते हुए जीतू पटवारी ने कहा, “मुख्यमंत्री सवालों से डरते हैं, इसलिए वे अभद्र भाषा का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने मुझे नौसिखिया और चप्पू कहा, लेकिन उन्हें समझना चाहिए कि चप्पू ही नाव को पार लगाता है। यदि मुख्यमंत्री को गालियां ही देनी हैं, तो वे मेरे सामने आकर दें।” पटवारी ने खुद को एक जिम्मेदार पद पर आसीन व्यक्ति बताते हुए कहा कि वे अपना काम कर रहे हैं और मुख्यमंत्री को भी विकास के कार्यों पर ध्यान देना चाहिए।
📋 500 करोड़ का ‘तबादला उद्योग’ का आरोप
जीतू पटवारी ने प्रदेश में ‘तबादला उद्योग’ को लेकर बड़ा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में 500 करोड़ रुपये का तबादला लेनदेन हुआ है। उन्होंने कहा, “24 घंटे में पटवारियों की लिस्ट बदलना इस बात का प्रमाण है कि सत्ता का दुरुपयोग हो रहा है। पटवारियों की ताकत को समझो, वरना अंधेरे में रहोगे।”
🔥 विवाद की पटकथा: कैसे शुरू हुई यह जंग?
दोनों नेताओं के बीच तनातनी की शुरुआत 30 मई को सतना में जीतू पटवारी द्वारा मुख्यमंत्री को ‘अभिनंदन लाल’ कहे जाने से हुई थी। इसके जवाब में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुजालपुर में जीतू पटवारी को ‘टपोरी लाल’ और ‘ढपोशंख’ कह डाला। 17 जून को उज्जैन में मुख्यमंत्री ने कांग्रेस अध्यक्ष को ‘पप्पू का चप्पू’ तक कह दिया। इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस लगातार आरोपों की बौछार कर रही है, तो वहीं भाजपा कांग्रेस के ‘पुराने चरित्र’ और ‘विकास विरोधी’ होने का दावा कर रही है।
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