PoJK: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में मौजूदा समय में भारी राजनीतिक उबाल देखने को मिल रहा है। विरोध प्रदर्शनों के बीच अब एक नया और तीखा नारा तेजी से लोकप्रिय हो रहा है: ‘ये जो दहशतगर्दी है, इसके पीछे वर्दी है।’ यह नारा, जो पहले बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा की पहचान बना था, अब PoJK की रैलियों का मुख्य केंद्र बन गया है।
⚔️ सरदार अमन खान का तीखा हमला
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सरदार अमन खान ने पाकिस्तान सेना और इस्लामाबाद सरकार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो जनता रोटी, रोजगार और बुनियादी अधिकारों की मांग कर रही है, उसे ‘आतंकवादी’ करार दिया जा रहा है। खान ने तर्क दिया कि यदि आप बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, सिंध या पंजाब के लोगों से पूछें, तो वे सभी सेना की कार्यप्रणाली को ही ‘असली डर’ का कारण बताएंगे। अब PoJK की जनता भी इसी कड़ी में शामिल हो गई है।
📋 क्या है प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें?
PoJK में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के पीछे मुख्य कारण पाकिस्तान सरकार की दमनकारी नीतियां और सैन्य प्रतिष्ठान का हस्तक्षेप है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
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राजनीतिक अधिकार: स्थानीय शासन में अधिक स्वायत्तता और जन-प्रतिनिधियों की भूमिका।
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आर्थिक राहत: बढ़ती महंगाई से मुक्ति और संसाधनों का उचित आवंटन।
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रोजगार: युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर।
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बेहतर प्रशासन: बुनियादी सुविधाओं जैसे अस्पताल, शिक्षा और सड़क नेटवर्क में सुधार।
🛡️ JKJAAC पर कार्रवाई और एमनेस्टी की निंदा
तनाव तब और बढ़ गया जब सरकार ने जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (JKJAAC) को आतंकवाद-रोधी कानून के तहत “प्रतिबंधित संगठन” घोषित कर दिया। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस फैसले की कड़ी निंदा की है। संस्था ने इसे संगठन बनाने की आजादी और शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों पर ‘गंभीर हमला’ करार दिया है। विधानसभा गठन को लेकर प्रशासन और समिति के बीच वार्ता विफल होने के बाद से ही स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है, जो इस्लामाबाद सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन चुकी है।
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