बालोद: बालोद के टाउन हॉल में अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज का 86वां स्थापना दिवस भव्य रूप में मनाया गया। इस प्रांतीय महाअधिवेशन में पूरे छत्तीसगढ़ से समाज के हजारों लोग एकत्र हुए। कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति, पारंपरिक नृत्य और सामाजिक एकजुटता की अनूठी मिसाल देखने को मिली।
⚖️ ‘सरकार से बड़ी समाज की जिम्मेदारी’
कार्यक्रम में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष प्रीतपाल बेलचंदन ने कहा कि आज के दौर में सरकार चलाना भले ही आसान हो, लेकिन समाज को संगठित और अनुशासित रखना सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने पूर्वजों द्वारा स्थापित रीति-नीतियों को समाज की आधारशिला बताया और सहकारिता के क्षेत्र में आदिवासी समाज के ऐतिहासिक योगदान की सराहना की।
🗽 शहीद गैंद सिंह नायक की प्रतिमा को मिली मंजूरी
समाज के केंद्रीय अध्यक्ष देवेंद्र माहला ने मंच से शहीद शिरोमणि गैंद सिंह नायक के बलिदान का स्मरण करते हुए उनकी आदमकद प्रतिमा डोंडी नगर में स्थापित करने की मांग रखी। मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा ने इस मांग को तत्परता से स्वीकार करते हुए जल्द प्रतिमा स्थापना का भरोसा दिलाया।
🗣️ इतिहास को याद रखना विकास के लिए जरूरी: सांसद
सांसद लक्ष्मी वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ 46 जनजातियों का प्रदेश है और हल्बा-हल्बी समाज की भूमिका इसमें अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने शहीद गैंद सिंह नायक को नमन करते हुए कहा कि 1857 की क्रांति में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कार्यक्रम में महिलाओं की भारी उपस्थिति को समाज की बढ़ती जागरूकता का परिचायक बताया।
🛡️ मां दंतेश्वरी के उपासक हैं हल्बा समाज
केंद्रीय अध्यक्ष देवेंद्र माहला ने बताया कि समाज की नींव 1940 में अंग्रेजों के दमन के खिलाफ रखी गई थी। उन्होंने कहा कि हल्बा समाज सदैव मां दंतेश्वरी का उपासक रहा है और संगठन का उद्देश्य राष्ट्रहित में कार्य करना तथा कुरीतियों व फिजूलखर्ची को समाप्त कर समाज को आधुनिक राह पर ले जाना है।
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