मुजफ्फराबाद: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) पर प्रतिबंध लगाने के बाद भड़के विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है। रावलाकोट शहर में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में अब तक 11 लोगों की जान जा चुकी है और 70 से अधिक लोग घायल हैं।
⚖️ लोग क्यों कर रहे हैं विरोध?
इस भारी विरोध के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण हैं:
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आरक्षण का मुद्दा: PoK विधानसभा में 12 सीटों का आरक्षण उन शरणार्थियों के लिए किया गया है, जो पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहते हैं। JAAC का मानना है कि इससे स्थानीय लोगों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर हो रहा है।
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आर्थिक और प्रशासनिक उपेक्षा: संगठन लंबे समय से महंगाई, बिजली की किल्लत, बेरोजगारी और प्रशासन की उदासीनता के खिलाफ आवाज उठा रहा है।
🚫 प्रतिबंध और इंटरनेट पर पाबंदी
पिछले सप्ताह PoK सरकार ने JAAC को ‘आतंकवाद-रोधी कानून’ के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया था। इसके बाद से पूरे क्षेत्र में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को ठप कर दिया गया है और मुख्य कार्यालयों को सील कर दिया गया है। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने इस हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए शांतिपूर्ण समाधान और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
📢 आंदोलन जारी रखने का ऐलान
प्रतिबंध और बल प्रयोग के बावजूद JAAC के नेताओं ने अपने आंदोलन को जारी रखने का संकल्प लिया है। 27 जुलाई को होने वाले चुनावों के मद्देनजर पूरे PoK में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और बड़े जमावड़ों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। फिलहाल, क्षेत्र में स्थिति अनिश्चित बनी हुई है और जनता का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है।
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