भोपाल: मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। शनिवार का दिन नामांकन और चुनावी तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहा। भाजपा ने अपने प्रत्याशी के रूप में तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस की ओर से मीनाक्षी नटराजन ने अपना नामांकन दाखिल किया है। हालांकि, मुख्य चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि क्या भाजपा किसी तीसरी सीट के लिए भी कोई बड़ा कदम उठाएगी।
📊 विधायकों का प्रशिक्षण और चुनावी तैयारी
चुनाव में किसी भी प्रकार की तकनीकी चूक से बचने के लिए शनिवार को भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने अपने विधायक दल की बैठकें बुलाईं। इन बैठकों में विधायकों को मतदान की जटिल प्रक्रिया, वोटों की वैधता और चुनावी रणनीति का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। पार्टियां यह सुनिश्चित करने में लगी हैं कि उनका कोई भी वोट खारिज न हो।
🤫 तीसरी सीट पर ‘गोपनीय’ रणनीति
यद्यपि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने सार्वजनिक तौर पर यह बयान दिया है कि पार्टी केवल दो सीटों पर चुनाव लड़ रही है और तीसरे उम्मीदवार को उतारने की फिलहाल कोई योजना नहीं है, लेकिन पार्टी सूत्रों के अनुसार ‘तीसरी सीट’ को लेकर मंथन जारी है। केंद्रीय नेतृत्व के संकेतों का इंतजार किया जा रहा है और अंतिम क्षणों में कोई अप्रत्याशित राजनीतिक कदम उठाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
♟️ सियासी शतरंज का खेल
राज्यसभा चुनाव की यह बिसात पूरी तरह गोपनीय रखी गई है। कांग्रेस जहाँ अपनी स्थिति मजबूत करने के प्रयास में है, वहीं भाजपा का ‘वेट एंड वॉच’ (Wait and Watch) मोड विपक्ष की बेचैनी बढ़ाने के लिए काफी है। 18 जून को होने वाला मतदान यह स्पष्ट कर देगा कि मध्य प्रदेश की सियासी पिच पर कौन सी पार्टी अपनी रणनीति में सफल रही।
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