सरगुजा जिले से एक बेहद दुखद मामला सामने आया है, जहां मोबाइल की एक पुरानी बैटरी ने 1 साल के मासूम बच्चे की जान ले ली। खेल-खेल में हुई यह छोटी सी लापरवाही एक बड़े हादसे में बदल गई। बैटरी फटने से बच्चा बुरी तरह झुलस गया और अस्पताल में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। इस घटना ने क्षेत्र में शोक की लहर पैदा कर दी है और ‘ई-वेस्ट’ (E-Waste) के सुरक्षित निपटान को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है।
💥 कैसे हुआ यह हादसा?
बच्चे के पिता आदित्य सिंह ने बताया कि मासूम अपने भाई-बहनों के साथ खेल रहा था। इसी दौरान वह घर के पास कचरे के ढेर तक पहुंच गया, जहां उसे एक पुरानी मोबाइल बैटरी मिली। नादानी में बच्चा उस बैटरी को उठाकर घर ले आया और खेल-खेल में उसे जलती हुई आग में डाल दिया। आग के संपर्क में आते ही बैटरी तेज धमाके के साथ फट गई। आग के बिल्कुल करीब होने के कारण बच्चे का चेहरा और पेट बुरी तरह से झुलस गए।
🏥 इलाज के दौरान तोड़ा दम
घटना के बाद परिजन बच्चे को लेकर आनन-फानन में पहले प्रेमनगर अस्पताल पहुंचे, जहां से उसे सूरजपुर जिला अस्पताल और अंततः अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। डॉक्टरों ने उसे बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन गंभीर रूप से झुलसने के कारण आज सुबह करीब 4 बजे बच्चे ने दम तोड़ दिया।
♻️ ई-कचरे (E-Waste) से सावधान रहने की जरूरत
यह घटना हमें याद दिलाती है कि घर में पड़ा पुराना इलेक्ट्रॉनिक कचरा (ई-कचरा) कितना खतरनाक हो सकता है। मोबाइल की पुरानी बैटरियों में रासायनिक तत्व होते हैं जो गर्मी या आग के संपर्क में आने पर भीषण धमाका कर सकते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ई-कचरे को बच्चों की पहुंच से दूर रखें और इसे हमेशा अधिकृत ‘ई-वेस्ट कलेक्शन सेंटर्स’ में ही डिस्पोज करें। यह न केवल हमारे पर्यावरण के लिए, बल्कि हमारे बच्चों की सुरक्षा के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
संपादकीय टिप्पणी: क्या आपको लगता है कि घर में पड़े पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फेंकने के लिए हमें और अधिक जागरूक होने की आवश्यकता है? क्या सरकारी स्तर पर ‘ई-वेस्ट’ संग्रहण के लिए हर मोहल्ले में कोई विशेष व्यवस्था होनी चाहिए? अपने विचार नीचे साझा करें।
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