जशपुर जिले में सरकार की जनकल्याणकारी ‘पंडित जवाहरलाल नेहरू उत्कर्ष योजना’ में धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। एक शासकीय शिक्षक ने अपनी वास्तविक आय छुपाकर फर्जी तरीके से आय प्रमाण पत्र बनवाया और अपनी बेटी को योजना का लाभ दिलाते हुए स्कूल में निःशुल्क प्रवेश करा दिया। पत्थलगांव पुलिस ने डीआईजी डॉ. लाल उमेद सिंह के निर्देश पर आरोपी शिक्षक चमर साय पैकरा को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।
📊 कैसे खुली फर्जीवाड़े की पोल?
शिक्षक चमर साय पैकरा की वास्तविक वार्षिक आय लगभग 6 लाख 79 हजार 471 रुपये है, लेकिन उसने खुद को केवल कृषक बताकर 75 हजार रुपये की आय वाला फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया। इस कृत्य से उसने शैक्षणिक सत्र 2024-25 में अपनी बेटी का दाखिला कक्षा छठवीं में करा लिया। मामले की शिकायत ददिबल प्रसाद विश्वकर्मा ने की थी, जिसके बाद पुलिस ने खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय और आदिवासी विकास विभाग से दस्तावेजों का मिलान किया।
⚖️ वास्तविक पात्रों के अधिकारों पर डाका
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि शिक्षक ने जानबूझकर गलत जानकारी दी थी। इस धोखाधड़ी के कारण योजना के वास्तविक पात्र, आर्थिक रूप से कमजोर और प्रतिभावान विद्यार्थी उस अवसर से वंचित रह गए, जिसके वे हकदार थे। डीआईजी डॉ. लाल उमेद सिंह ने स्पष्ट किया है कि सरकारी योजनाओं में फर्जीवाड़े के जरिए पात्र हितग्राहियों के अधिकारों से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
👮 पुलिस की सख्त चेतावनी
पत्थलगांव पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आरोपी शिक्षक के विरुद्ध मामला पंजीबद्ध कर कार्रवाई की है। पुलिस प्रशासन की यह कार्रवाई उन सभी लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शासकीय योजनाओं का अनुचित लाभ उठाने की कोशिश करते हैं। भविष्य में भी ऐसे मामलों में कठोर वैधानिक कार्रवाई जारी रहेगी।
संपादकीय टिप्पणी: सरकारी योजनाओं में इस तरह की सेंधमारी न केवल भ्रष्टाचार है, बल्कि यह उन गरीब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है जिनके लिए ये योजनाएं बनी हैं। क्या आपको लगता है कि ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने वाले सरकारी कर्मचारियों की सेवा बर्खास्तगी की जानी चाहिए? अपने विचार नीचे साझा करें।
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