भारत में तंबाकू का सेवन केवल एक बुरी आदत नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है। सिगरेट, बीड़ी, गुटखा और पान मसाला जैसे उत्पादों के कारण ओरल कैंसर (मुंह का कैंसर) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। 31 मई को ‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस’ के अवसर पर विशेषज्ञों ने इसे एक ‘साइलेंट एपिडेमिक’ करार दिया है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षणों को लोग अक्सर मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
📊 क्या कहती है वैश्विक रिसर्च?
कैंसर अनुसंधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी (IARC) की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में दुनियाभर में ओरल कैंसर के लगभग एक-तिहाई मामले धुआं रहित तंबाकू और सुपारी के सेवन से जुड़े थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से करीब 88 प्रतिशत मामले दक्षिण-मध्य एशिया (जिसमें भारत प्रमुख है) में दर्ज किए गए। निम्न और मध्यम आय वाले देशों में तंबाकू की बढ़ती आदत इसे एक बड़े खतरे के रूप में स्थापित कर रही है।
⚠️ शुरुआती संकेतों को पहचानें
कैंसर हीलर सेंटर के एमडी डॉ. तरंग कृष्णा के अनुसार, कैंसर तब सबसे घातक होता है जब उसे सामान्य छाले समझकर छोड़ दिया जाता है। यदि आपको निम्नलिखित संकेत दिखें, तो सतर्क हो जाएं:
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मुंह में बार-बार छाले होना।
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जीभ या गालों के अंदर सफेद या लाल धब्बे दिखना।
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मसूड़ों में असामान्य सूजन।
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मुंह खोलने में लगातार परेशानी होना।
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आवाज में बदलाव या निगलने में कठिनाई।
🧒 युवाओं के लिए बढ़ती चिंता
भारत में ई-सिगरेट, वेपिंग और फ्लेवर्ड तंबाकू उत्पादों का युवाओं के बीच बढ़ता चलन भविष्य के लिए बड़ा खतरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम उम्र में शुरू हुई यह लत कैंसर की संभावना को कई गुना बढ़ा देती है। इसके साथ ही शराब का सेवन इस जोखिम को और अधिक खतरनाक बना देता है।
🛡️ जागरूकता ही एकमात्र बचाव
इस ‘खामोश महामारी’ को रोकने के लिए नियमित ओरल चेकअप और तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाना अनिवार्य है। जागरूकता अभियानों, तंबाकू नियंत्रण कानूनों के सख्त पालन और स्वस्थ जीवनशैली के माध्यम से ही इस कैंसर से बचा जा सकता है। याद रखें, शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर ओरल कैंसर का इलाज संभव है।
संपादकीय टिप्पणी: तंबाकू की लत एक धीमा जहर है। क्या हमें सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू नियंत्रण कानूनों को और अधिक कड़ाई से लागू करने की आवश्यकता है? अपने विचार नीचे साझा करें।
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