Pune Crime Update: नाबालिग से दुष्कर्म-हत्या पर महिला आयोग सख्त; विरोध में मुंबई-बेंगलुरु नेशनल हाईवे जाम

महाराष्ट्र

पुणे जिले के भोर तालुका के नसरापुर क्षेत्र में एक चार साल की बच्ची के साथ हुई दुष्कर्म और हत्या की सनसनीखेज वारदात ने पूरे महाराष्ट्र को झकझोर दिया है. इस घटना पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है. आयोग ने कहा कि यह जघन्य अपराध गहरी पीड़ा और आक्रोश उत्पन्न करता है.

महिला आयोग ने इस घोर अमानवीय कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि ऐसे अपराध बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन हैं और समाज की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं.

दोषी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग

आयोग की अध्यक्षा ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) को इस मामले में संज्ञान लेकर जांच की निगरानी सुनिश्चित करने तथा दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है. साथ ही, पीड़ित परिवार को तत्काल सहायता और मुआवजा, POCSO के तहत समयबद्ध चार्जशीट दाखिल करने तथा फास्ट ट्रैक कोर्ट में जल्द से जल्द सुनवाई सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया है. हर बालिका की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है.

यौन उत्पीड़न के बाद बच्ची की हत्या

दरअसल महाराष्ट्र के पुणे जिले की भोर तहसील में चार वर्षीय बच्ची का कथित तौर पर यौन उत्पीड़न करने के बाद उसकी हत्या करने के आरोप में आपराधिक इतिहास वाले आरोपी (65) को गिरफ्तार किया गया. इस घटना के बाद इलाके में उग्र प्रदर्शन शुरू हो गये.

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि पेशे से मजदूर आरोपी शुक्रवार को खाना खिलाने का लालच देकर बच्ची को मवेशियों के बाड़े में ले गया और उसका यौन उत्पीड़न किया. उन्होंने बताया कि आरोपी ने बाद में पत्थर से वार कर बच्ची की हत्या कर दी. अधिकारी ने बताया कि आरोपी को एक घर के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर गिरफ्तार किया गया. उन्होंने बताया कि फुटेज में आरोपी बच्ची के साथ नजर आया था.

आरोपी के 7 मई तक पुलिस हिरासत में भेजा

पुलिस के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने बताया कि बाद में आरोपी को पुणे के सत्र न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे सात मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया.

मराठा संगठनों के सदस्यों ने अदालत परिसर में आरोपी को ले जा रहे पुलिस वाहन को रोकने की कोशिश की. इस घटना से भोर क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया, सैकड़ों ग्रामीण स्थानीय चौकी पर जमा हो गए और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे. उन्होंने मुंबई-बेंगलुरु नेशनल हाईवे को भी जाम कर दिया. हालांकि नेशनल हाईवे को अवरुद्ध करने वाले लोगों को पुलिस ने तितर-बितर कर दिया.

15 दिनों के भीतर आरोपपत्र करेंगे दाखिल

पुणे (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि मामले में 15 दिनों के भीतर आरोपपत्र दाखिल कर दिया जाएगा और सुनवाई में तेजी लाई जाएगी. उन्होंने कहा कि आरोपी का आपराधिक इतिहास है, उसके खिलाफ 1998 और 2015 में मामले दर्ज किए गए थे. दोनों मामलों में उसे बरी कर दिया गया था. वह एक मजदूर है और आमतौर पर गांव में घूमता रहता है और कभी-कभार काम करता है.

मुख्यमंत्री ने सजा दिलाने का दिया आश्वासन

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस घटना को बेहद शर्मनाक व गहरा दुखदायी बताया और त्वरित सुनवाई का वादा किया. फडणवीस गृह विभाग के प्रमुख भी हैं. उन्होंने कहा, हम हाई कोर्ट से विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने का अनुरोध करेंगे. आरोपी को जल्द से जल्द मौत की सजा दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा. सीएम फडणवीस ने यह भी कहा कि इस घटना का राजनीतिकरण करना असंवेदनशील है. उन्होंने बच्ची के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि सरकार इस कठिन समय में उनके साथ खड़ी है.

मौत की सजा की मांग

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी)- शरद पवार गुट के नेता और पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने इस घटना को बेहद निंदनीय बताते हुए आरोपी के लिए मौत की सजा की मांग की. उन्होंने कहा कि ऐसे अपराधी समाज में खुलेआम कैसे घूम रहे हैं? जब मैं महा विकास आघाडी सरकार में गृह मंत्री था, तब हमने शक्ति अधिनियम (महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए कठोर सजा का प्रावधान) लागू किया था, जिसे केंद्र सरकार की अंतिम मंजूरी मिलनी बाकी है. इस कानून की सख्त जरूरत है लेकिन केंद्र और राज्य सरकारें इसे लागू करने के बजाय एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रही हैं.

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