चंडीगढ़: मानवीय संवेदनाओं और मृतकों की गरिमा को ध्यान में रखते हुए हरियाणा मानवाधिकार आयोग (HHRC) ने प्रदेश सरकार को एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में पर्याप्त संख्या में शव वाहनों (Hearse Vans) की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि किसी भी निर्धन या बेसहारा परिवार को अपने परिजनों के शव को ले जाने के लिए कठिनाई का सामना न करना पड़े।
गरिमापूर्ण अंतिम विदाई का अधिकार
आयोग ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सम्मानजनक अंतिम संस्कार और शव को उचित तरीके से ले जाना व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। अक्सर देखा जाता है कि सरकारी अस्पतालों में शव वाहन न होने के कारण गरीब परिवारों को निजी एम्बुलेंस संचालकों की मनमानी का शिकार होना पड़ता है या मजबूरी में शव को अन्य साधनों से ले जाना पड़ता है।
प्रदेश के सभी नागरिक अस्पतालों और जिला मुख्यालयों पर कम से कम एक या आवश्यकतानुसार अधिक शव वाहन उपलब्ध कराए जाएं। गरीब और लाचार परिवारों के लिए यह सेवा निशुल्क या न्यूनतम वहन करने योग्य दर पर उपलब्ध होनी चाहिए। हर जिले के स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन को इन वाहनों के रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी लेनी होगी।
सरकार से मांगी स्टेटस रिपोर्ट
हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार के संबंधित विभाग को नोटिस जारी कर इस दिशा में अब तक उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने पूछा है कि वर्तमान में कितने जिलों में सरकारी शव वाहन संचालित हैं और जहाँ कमी है, वहां नई व्यवस्था कब तक की जाएगी।
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