हमारी अनमोल धरोहर! 200 साल पुरानी दुर्लभ पाण्डुलिपियों को मिला नया जीवन, अब युवा पीढ़ी भी जान सकेगी प्राचीन इतिहास

छत्तीसगढ़

रायपुर. नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है. प्राचीन और दुर्लभ पाण्डुलिपियों को सहेजने का काम ज्ञानभारतम् मिशन कर रहा है. करीब 200 वर्ष पुरानी ताड़पत्र पाण्डुलिपियों का संग्रहण न सिर्फ सांस्कृतिक धरोहर को बचा रहा है, बल्कि युवाओं के लिए ज्ञान की अमूल्य विरासत भी सुरक्षित कर रहा है.

ज्ञानभारतम् मिशन से सहेजी जा रही धरोहर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के आह्वान पर शुरू किए गए ज्ञानभारतम् मिशन के तहत रायपुर जिले में प्राचीन पाण्डुलिपियों के संरक्षण और दस्तावेजीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है. इसका उद्देश्य ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल माध्यम से सुरक्षित रखना है.

200 वर्ष पुरानी दुर्लभ पाण्डुलिपियों का संग्रहण

कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में जिले में कई स्थानों से दुर्लभ पाण्डुलिपियों का संग्रह किया जा रहा है. इसी कड़ी में सेजेज निवेदिता, गुरु नानक चौक रायपुर की व्याख्या नीतू शर्मा ने लगभग 200 वर्ष पुरानी पाण्डुलिपियों का संग्रहण किया है.

ताड़पत्र पर अंकित प्राचीन ज्ञान की विरासत

ये पाण्डुलिपियां डॉ. लक्ष्मीकांत पंडा के निवास से प्राप्त हुई हैं, जिनका मूल संबंध महासमुंद जिले के ग्राम बिरकोल से है. ताड़पत्र पर लिखी इन पाण्डुलिपियों में ज्योतिष और कर्मकांड से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज हैं, जो उस समय की ज्ञान परंपरा को दर्शाती हैं.

युवा पीढ़ी के लिए ज्ञान का खजाना

उड़िया भाषा में लिखी ये पाण्डुलिपियां केवल ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध परंपरा का जीवंत प्रमाण हैं. ज्ञानभारतम् पोर्टल के माध्यम से इन्हें सुरक्षित कर नई पीढ़ी को उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि युवा अपनी संस्कृति और विरासत से जुड़ सकें.

संरक्षण से भविष्य की दिशा

ज्ञानभारतम् मिशन के जरिए ऐसे प्रयास न सिर्फ अतीत को संरक्षित कर रहे हैं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को अपनी पहचान समझने का अवसर भी दे रहे हैं. यह पहल सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के साथ-साथ समाज में जागरूकता भी बढ़ा रही है.

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