केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी को तेज कर दिया है. सरकार ने इस दिशा में बड़ा कदम उठामे हुए संविधान संशोधन बिल की प्रति सांसदों को दे दी है. सरकार की तरफ से कानून मंत्री मंत्री अर्जुन राम मेघवाल इस बिल को लोकसभा में पेश करेंगे. केंद्र सरकार ने एक तरह से अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. दरअसल, सरकार तीन अहम विधेयक लेकर आ रही है, जिनका मुख्य उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई (33%) आरक्षण देना और लंबे समय से रुके परिसीमन की प्रक्रिया को फिर से शुरू करना है.
इन प्रस्तावित बदलावों के तहत लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने की योजना है. इसके जरिए संविधान के कुछ अनुच्छेदों में बदलाव किया जाएगा, ताकि सीटों का बंटवारा मौजूदा जनसंख्या के हिसाब से हो सके. विधेयक के अनुसार, लोकसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या बढ़ाकर 815 की जा सकती है. इसके अलावा, केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 तक सीटें हो सकती हैं. अभी सीटों की संख्या 1971 की जनगणना के आधार पर तय है, जबकि देश की आबादी और हालात काफी बदल चुके हैं. बताया जा रहा है कि विधेयक पारित होने के बाद परिसीमन आयोग की सिफारिशें गजट में प्रकाशित होंगी. इसके बाद होने वाले चुनाव नए परिसीमन और आरक्षण के आधार पर कराए जाएंगे.
अलग-अलग चुनावों में बदलती रहेंगी आरक्षित सीटें
इसे लेकर सरकार का कहना है कि लंबे समय से सीटों का नया बंटवारा रुका हुआ था. इस विधेयक से वह रोक हटेगी और परिसीमन आयोग नए चुनावी क्षेत्र तय कर सकेगा. नए विधेयक में प्रावधान है कि नवीनतम उपलब्ध जनगणना आंकड़ों के आधार पर परिसीमन कर महिला आरक्षण लागू किया जा सकेगा. यह करीब 15 साल तक लागू रहेगा. इस विधेयक के तहत नवीनतम जनगणना के आंकड़ों के आधार पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलने वाली सीटों की संख्या बदली जाएगी. ताकि सभी क्षेत्रों में महिलाओं को मौका मिल सके. परिसीमन विधेयक का उद्देश्य देश में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों का पुनर्गठन करना है.
विधेयक में परिसीमन आयोग बनाने का प्रावधान
साथ ही, संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं नए सिरे से तय की जाएंगी, ताकि हर क्षेत्र में जनसंख्या के अनुसार संतुलन बनाया जा सके. विधेयक में परिसीमन आयोग बनाने का प्रावधान है. इस आयोग के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त या कार्यरत न्यायाधीश होंगे. आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त या उनके द्वारा नामित कोई चुनाव आयुक्त और संबंधित राज्य के राज्य चुनाव आयुक्त भी सदस्य होंगे. इस विधेयक की एक अहम बात यह है कि इसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए लगभग एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है.
बिल को पास करवाने के लिए चाहिए 362 सांसदों के वोट
लोकसभा में इस बिल को पास करवाने के लिए 362 सांसदों को पक्ष में वोट करना होगा जबकि एनडीए सांसदों की 293 है यानि केंद्र सरकार को 69 वोट और जुटाने होंगे. हालांकि सरकार का भरोसा है कि महिलाओं से जुड़े इस बिल को सभी दलों ने पहले भी समर्थन दिया था और आगे भी देंगे. सरकार का कहना है कि ऐसे महत्वपूर्ण बिल पर विपरीत विचार रखने वाली राजनीतिक पार्टियां वोटिंग के जरिए सीधे विरोध करने के बजाय अनुपस्थिति दर्ज करवाती हैं, यानि वॉक आउट का रास्ता अख्तियार करती हैं. जबकि सदन में मौजूद सांसदों के कुल संख्या के ही आधार पर दो तिहाई बहुमत तय किया जाता है.
अंतिम फैसला गजट में प्रकाशित होने के बाद होगा प्रभावी
इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए भी आरक्षण शामिल होगा. ये आरक्षित सीटें अलग-अलग क्षेत्रों में रोटेशन के आधार पर तय की जाएंगी. परिसीमन आयोग अपने प्रस्तावों को सार्वजनिक करेगा और जनता से आपत्तियां व सुझाव भी लेगा. अंतिम फैसला गजट में प्रकाशित होने के बाद प्रभावी होगा और इसके बाद होने वाले चुनाव नए परिसीमन के आधार पर कराए जाएंगे. संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन करके सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव है. 131 संविधान संशोधन के जरिए सीटों की कुल संख्या 850 बधाई जाने का प्रस्ताव है.
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