Delhi-Dehradun Expressway vs Old Route: मेरठ, मुजफ्फरनगर और मुरादाबाद वालों के लिए कौन सा रास्ता बेहतर? जानें समय और टोल का अंतर

उत्तराखण्ड

Meerut-Moradabad News: आज उत्तर भारत के लिए एक बड़ा दिन है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थोड़ी ही देर में सहारनपुर में रोड शो के बाद दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का विधिवत लोकार्पण कर देंगे. जहां एक ओर सरकार और दिल्ली-एनसीआर के लोग इस 2.5 घंटे के सफर के सपने को साकार होता देख रहे हैं. वहीं, मेरठ और मुरादाबाद मंडल के यात्रियों और ड्राइवरों के बीच इसे लेकर एक अलग ही बहस छिड़ी हुई है.

मेरठ की यदि बात करें तो देहरादून जाने के लिए NH 58 का सहारा मेरठवासी लेते हैं. मेरठ से देहरादून का सफर 175 किलोमीटर का है जो एक दशक पहले तक 5 घंटे में पूरा होता था. जिसके बाद मुजफ्फरनगर, पुरकाजी, रुड़की में बायपास बना दिया, जिससे ये सफर मेरठवासियो के लिए अब 3 घंटे के आसपास पूरा हो जाता है.

हालांकि, पहाड़ों की चढ़ाई के समय जाम से जरूर लोगों को झूझना पड़ता है. तो ऐसे में मेरठवासियों के लिए सहारनपुर से ये एक्सप्रेस वे कारगर साबित हो सकता है, ताकि पहाड़ों में चढ़ाई के समय समय ज्यादा न लगे. वहीं, मुजफ्फरनगर वालों के लिए तो पुराना रूट की फायदेमंद रहेगा.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और बिजनौर जिले के लोगों के लिए यह एक्सप्रेसवे सफर की क्रांति कम और महंगा विकल्प ज्यादा नजर आ रहा है. आइए समझते हैं कि क्यों ये यात्री नए एक्सप्रेसवे के बजाय पुराने रास्तों को प्राथमिकता दे रहे हैं.

एक्सप्रेसवे बनाम पुराना रूट

मुरादाबाद और बिजनौर के स्थानीय निवासियों सलमान अतीक, गुड्डू और नजीर का स्पष्ट मानना है कि नया एक्सप्रेसवे उनके लिए राहत तो लाया है, लेकिन वह उनके दैनिक या व्यावसायिक सफर का हिस्सा शायद ही बनेगा. मुरादाबाद से बिजनौर और हरिद्वार होते हुए देहरादून जाने वाला रास्ता भौगोलिक रूप से काफी छोटा पड़ता है. यदि मुरादाबाद का कोई व्यक्ति नए एक्सप्रेसवे का उपयोग करना चाहे, तो उसे पहले मुजफ्फरनगर या सहारनपुर की तरफ लंबा चक्कर काटकर जाना होगा. इससे न केवल समय ज्यादा लगेगा, बल्कि ईंधन का खर्च भी बढ़ जाएगा.

बिजनौर वालों का तर्क: बिजनौर के लोगों के लिए देहरादून उनके घर के पास जैसा है. हरिद्वार होते हुए वे सीधे और कम समय में देहरादून पहुंच जाते हैं. उनके लिए एक्सप्रेसवे पर चढ़ना दिल्ली की तरफ पीछे जाकर फिर आगे आने जैसा है.

भारी-भरकम दरों ने बढ़ाई चिंता

एक्सप्रेसवे पर रफ्तार तो है, लेकिन इसकी कीमत काफी ऊंची रखी गई है. मुरादाबाद और बिजनौर के मुसाफिरों के लिए पैसे की बचत एक बड़ा फैक्टर है.

रूट (दिल्ली से) एक तरफ का शुल्क (₹) 24 घंटे में वापसी (₹)
देहरादून तक ₹675 ₹1010
सैयद माजरा (सहारनपुर) ₹530 ₹790
रसूलपुर (सहारनपुर) ₹420 ₹630
काठा (बागपत) ₹235 ₹350

पुराने रास्ते का खर्च

मुरादाबाद से देहरादून के बीच पुराने मार्ग पर रजबपुर/बछरायूं और मुजफ्फरनगर के पास पड़ने वाले टोल प्लाजा का कुल खर्च लगभग 250-350 रुपये के बीच बैठता है. धामपुर से जाने वालों को मात्र 2 टोल और उमरी वालों को केवल 1 टोल देना पड़ता है. ऐसे में 675 रुपये का एक तरफा टोल स्थानीय लोगों को बहुत ज्यादा अखर रहा है.

विशेषता नया दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पुराना बिजनौर-हरिद्वार रूट
कनेक्टिविटी अक्षरधाम (दिल्ली) से सीधे देहरादून मुरादाबाद-बिजनौर-हरिद्वार-देहरादून
सड़क की स्थिति 12-लेन और एलिवेटेड, विश्वस्तरीय सिंगल/डबल लेन, भीड़भाड़ वाले इलाके
टोल खर्च बहुत अधिक (₹675 एक तरफ) काफी कम (₹250-₹350 लगभग)
मुरादाबाद के लिए दूरी लंबी और घुमावदार पड़ती है सीधी और शॉर्टकट
व्यावहारिक पसंद दिल्ली-NCR के लोगों के लिए पहली पसंद स्थानीय व्यापारियों और ड्राइवरों की पसंद

दिल्ली से देहरादून का नया सफर कैसा होगा?

दिल्ली में अक्षरधाम से शुरू होने वाला यह सफर गीता कॉलोनी, शास्त्री पार्क, खजूरी चौक और लोनी बॉर्डर होते हुए बागपत पहुंचता है. यहां से यह बड़ौत, शामली और सहारनपुर होते हुए राजाजी नेशनल पार्क के वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर के जरिए देहरादून को जोड़ता है. प्राइवेट कारों के लिए सफर 2.5 घंटे का होगा, जबकि कॉमर्शियल गाड़ियां (स्पीड गवर्नर के कारण) इसे 3 घंटे में पूरा करेंगी.

मुरादाबाद के स्थानीय लोगों का कहना है कि वे नए एक्सप्रेसवे का रुख तभी करेंगे जब पुराने रास्ते पर कोई बड़ी दुर्घटना हो जाए या सड़क पूरी तरह खराब हो. सामान्य परिस्थितियों में कम दूरी और कम टोल वाला बिजनौर-हरिद्वार मार्ग ही उनकी पहली पसंद बना रहेगा.

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