हमारे समाज में कुछ लोगों के लिए पैसा इतना महत्वपूर्ण हो गया है कि वे इसकी खातिर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने से भी गुरेज नहीं करते। ये लोग पैसे लेने के बावजूद अपने ग्राहकों को बीमारियां परोस रहे हैं। हलका साहनेवाल के भामियां इलाके में चल रही आधा दर्जन अवैध शराब बनाने वाली फैक्ट्रियों पर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से मेहरबान नजर आ रहा है, क्योंकि सब कुछ देखकर भी स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से बे-खबर नजर आता है।
भामियां कलां की दर्शन अकादमी में 3 घरेलू निर्मित खाद्य और पेय पदार्थ निर्माण कारखाने हैं, जो भुजिया, मठियां, बालूशाही, पतीसा और अन्य खाद्य और पेय उत्पाद बनाते हैं। उक्त फैक्ट्रियों में माल तैयार करते समय खाद्य अधिनियम के नियमों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है, लेकिन नंगे पैर और गंदगी से भरे इन सामानों को बनाने वाले कारीगर न तो हाथों में दस्ताने पहनते हैं और न ही टोपी पहनते हैं।
इनकी काम करने वाली लैबर भी उसी स्थान पर ही रहती है, जहां सामान बनता है। सामान बनाने वाली भट्ठियां बाथरूम और टॉयलेट बनी हुई है, साथ ही वहां मंडराते मछर, मखीया, खाने-पीने का सामान पर बैठे आम देखा जा सकता है। इसके अलावा भी ताजपुर रोड पर भी कुछ फैक्टिरयां है, जहां घटिया किस्म की बर्फी, लड्डू, रसगुल्ले और अन्य मिठाई तैयार की जाती है। हर रोज सुबह इन फैक्टिरयों के सामने आटे से सप्लाई करने वालों की कतारें लग जाती है। जहां खाने-पीने वाला सामान लेकर उन इलाकों में जहां प्रवासी और गरीब लोग रहते है, सप्लाई करते है। लोगों ने मांग की है कि इन फैक्टिरयों की जांच करते इन पर बनती कार्रवाई की जानी चाहिए। इस संबंध में जब DHO डॉ. अमरजीत कौर से बात की तो उन्होंने कहा कि हमारा विभाग रूटीन जांच करता रहता है। हालांकि, इस क्षेत्र के बारे में मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली है, हम फिर भी इसकी जांच करेंगे और ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएंगी।
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