उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के कोतवाली इलाके के रहने वाले चंद्रशेखर रावत पोस्टमार्टम हाउस पर आउटसोर्सिंग कर्मचारी के रूप में पिछले 10-12 सालों से कम कर रहे थे. वह पोस्टमार्टम के लिए आने वाले शव का चीर फाड़ का भी काम कर पोस्टमार्टम में मदद करते थे. इसके अलावा उन्हें पिछले कुछ सालों से लोगों से अलग दिखने का नशा था. शायद यही कारण था कि वह आए दिन अलग-अलग गेटअप में नजर आया करते थे. साथ ही उन्हें रील बनाने का भी शौक चढ़ गया था और अपने इंस्टाग्राम आईडी पर आए दिन वह वीडियो बनाकर अपलोड किया करते थे.
जानकारी के मुताबिक रील बनाने के लिए चंद्रशेखर रावत गुरुवार की रात गाजीपुर के रेलवे स्टेशन के पास एक ई-रिक्शा के ऊपर चढ़े और चलते हुए रिक्शे पर डांस कर वीडियो शूट करने लगे. रिक्शा जैसे ही आगे बढ़ा और अचानक उन्हें एक हल्का सा झटका लगा तो उनका बैलेंस गड़बड़ा गया. रिक्शे से सीधे सर के बल सड़क पर आकर गिरे. जब तक लोग कुछ समझ पाते, वह बेहोश हो चुके थे और जैसे ही लोग इन्हें मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे तो डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.
साथी कर्मचारी ने जताया दुख
वहीं उनकी मौत के बाद चंद्रशेखर रावत को जानने वाले लोग अचानक से सहम गए और उनकी मृत्यु पर किसी को विश्वास नहीं हो रहा था. खुद पोस्टमार्टम हाउस के चीफ फॉर्मासिस्ट राजेश दुबे भी जब चंद्रशेखर रावत के शव को देखें तो उन्हें विश्वास नहीं हुआ और उन्होंने आखिर कह दिया कि रोज दूसरे का पोस्टमार्टम करने वाले का आज खुद पोस्टमार्टम करना पड़ेगा.
लावारिस लाशों के अंतिम संस्कार में करता था मदद
लावारिसों के वारिस के नाम से मशहूर कुंवर वीरेंद्र सिंह ने बताया कि चंद्रशेखर रावत जिसे लोग पोस्टमार्टम कराने की वजह से यमराज के नाम से भी जानते थे. आए दिन उनके द्वारा पोस्टमार्टम हाउस पर लावारिस शव ले जाने पर चंद्रशेखर के द्वारा काफी मदद की जाती थी, लेकिन अब उनकी मौत के बाद उनका एक साथी बिछड़ गया जो लावारिसों के अंतिम संस्कार में मदद करता था. उन्होंने बताया कि चंद्रशेखर रावत की दो बीबियां थीं और दोनों से बच्चे भी थे.
मौत पहले कई लोगों का किया था पोस्टमार्टम
वहीं पोस्टमार्टम हाउस के रिकॉर्ड के अनुसार, चंद्रशेखर रावत ने रामपुर माझा में फांसी लगाई महिला ,नोनहरा में ट्रेन से कटकर मां रीता गुप्ता एवं बेटी रिया का पोस्टमार्टम भी कराया था. शाम को सबसे अंत में खानपुर के गौरहट में नदी में डूबे बालक ऋषभ उर्फ रितेश का भी पोस्टमार्टम करने के बाद वह अपने घर के लिए रवाना हुआ था. चंद्रशेखर रावत रील बनाने के लिए रिक्शे के ऊपर चढ़ा लेकिन उसके बाद फिर वह नीचे ऐसे उतरे की अपनी जिंदगी सेहीहाथधोबैठे.
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