मुलायम सरकार ने वापस लिए थे 1978 के संभल दंगों का केस! आदेश पत्र पर मचा बवाल, फिर से होगी जांच

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के संभल में साल 1976 और 78 में दो बड़े दंगे हुए थे. माना जाता है कि उस समय तक संभल हिन्दू बाहुल्य था, लेकिन उसके बाद से ही यह मुस्लिम बाहुल्य हो गया था. इन दंगों को लेकर पुलिस ने कुल 16 मुकदमे दर्ज किए थे, लेकिन 23 दिसंबर 1993 को राज्य में मुलायम सिंह यादव की सरकार बनी तो 16 में से आठ मुकदमे वापस ले लिए गए थे. इन मुकदमों के वापस होते ही मामला लगभग रफा दफा हो गया था. इस संबंध में राज्य सरकार का आदेश अब सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है.

मुकदमे वापस लेने के संबंध में आदेश पत्र उत्तर प्रदेश सरकार के विशेष सचिव आरडी शुक्ला ने मुरादाबाद के कलेक्टर के लिए जारी किया था. उस समय प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी. इस पत्र में कहा गया था कि संभल नगर में 30 मार्च 1978 में हुए दंगे से संबंधित 16 मुकदमों में से 08 मुकदमों को शासन ने वापस लेने का फैसला किया है. यह पत्र सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया है. दंगा पीड़ितों का कहना है कि उन्हें जितना दुख दंगे में हुई क्षति से नहीं हुआ, उससे ज्यादा सरकार के फैसले से हुआ है.

आजम-बर्क की वजह से केस वापसी का आरोप

आरोप है कि आजम खान और संभल के तत्कालीन सांसद शफीकुर्र रहमान बर्क की पैरवी शासन ने मुकदमे वापस लिए थे. बता दें कि 1978 दंगे में बड़ी संख्या में हिन्दू मारे गए थे. वहीं बड़ी संख्या में हिन्दुओं ने पलायन किया था. दंगा पीड़ितों के मुताबिक वह 47 साल से इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं. दंगा पीड़ित विष्णु शरण रस्तोगी के मुताबिक 29 मार्च 1978 को सूर्योदय के साथ सांप्रदायिक दंगा शुरू हुआ था. हिन्दुओं के साथ मार-काट और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में आग लगाई जा रही थी. हालात ऐसे बन गए थे कि खुद को बचाना मुश्किल हो गया. अन्य दंगा पीड़ित नीतीश गर्ग ने बताया कि दंगाइयों ने उनकी आढ़त की दुकान में आग लगाई थी. ऐसे में माहौल में उन्हें पलायन करना पड़ा था.

खंगाली जा रही हैं दंगों की फाइलें

मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के निर्देश पर मुरादाबाद जिला प्रशासन ने इस घटनाक्रम की फाइलें खंगालनी शुरू कर दी है. सूत्रों के मुताबिक अब तक 10 फाइलें ढूंए ली गई हैं. इन दस्तावेजों में दंगें और हत्या से जुड़े मामलों की पड़ताल की जा रही हैं. पता चला है कि कई मामलों में जांच अधिकारी और पीड़ितों के बयान लिए बिना ही फाइलें बंद कर दी गईं. बताया जा रहा है कि 1978 के दंगे का रिकॉर्ड 1993 तक तो मिल रहा है, लेकिन उसके बाद को कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं है. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक अब इन सभी मामलों की नए सिरे से जांच होगी.

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry