जिसे पहनाया डायमंड का ब्रेसलेट, उसी ने दिया धोखा…शिवानी कुमारी पर बरसीं सना सुल्तान

मनोरंजन

सना सुल्तान बिग बॉस ओटीटी के सीजन 3 से बाहर हो गई हैं. सना के शो से बाहर होते समय शिवानी कुमारी के साथ की बदसलूकी ऑडियंस को बिलकुल भी रास नहीं आ रही है. इस बात को लेकर बिग बॉस के फैन्स सना सुल्तान को सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल कर रहे हैं. हाल ही में टीवी9 हिंदी डिजिटल के साथ की एक्सक्लूसिव बातचीत में सना ने शिवानी के साथ अपने इस रवैये की सफाई दी है. सना का कहना है कि दोस्त होने के बावजूद जिस तरह से उन्हें घर से बाहर निकालने के लिए शिवानी कोशिश कर रही थीं, वो देखकर उन्हें बड़ा दुख हुआ.

सना ने कहा, “जिस तरह से मैं शिवानी के साथ पेश आई, उसके लिए मेरे पास वाजिब वजह है. मैं इससे पहले एक बात आपको बताना चाहती हूं कि मैं फेक पर्सनालिटी नहीं हूं. जो मैं दिल में महसूस करती हूं वही मेरी जुबान पर होता है और मेरे चेहरे पर भी. मैं चाहती, तो कैमरा के लिए स्माइल कर सकती थी. लेकिन उस वक्त मैं बहुत नाराज थी. मैं मानती हूं कि बिग बॉस ने हमें टास्क दिया था और इस टास्क में घरवालों को मुझे डिस्ट्रैक्ट करना था. दरअसल इस टास्क से मुझे कोई दिक्कत नहीं थी. लेकिन शिवानी के अंदाज से मैं खफा थी.”

दोस्त ने दिया धोखा

आगे सना बोली ,”शिवानी जानती थीं कि ये एलिमिनेशन टास्क है. मैं इस बात से बिलकुल भी गुस्सा नहीं हूं कि वो मुझे डिस्ट्रैक्ट कर रही थी. लेकिन अरमान के साथ हाथ मिलाकर उन्होंने मुझे धोखा दिया. अरमान मेरी बॉडी का, मेरे फेस का मजाक उड़ा रहे थे और शिवानी भी वही कर रही थीं. वो उनका साथ दे रही थीं और इस टास्क से 4 दिन पहले ही हम दोनों की दोस्ती हो गई थी. मैंने उन्हें डायमंड का फ्रेंडशिप बैंड पहनाया था. मैंने उन्हें पूछा था कि तुम मेरी दोस्त बनोगी? क्योंकि माना कि वो बड़बोली हैं, लेकिन मुझे लगता था कि वो दिल की बड़ी साफ है. उसने भी हां कहा था और हम अच्छे दोस्त बन गए थे.”

पसंद नहीं आया शिवानी का रवैया

शिवानी के दिए धोखे के बारे में बात करते हुए सना ने कहा, “जब मैंने किसी को दिल से अपना दोस्त माना है और वो दोस्त नॉमिनेशन भी नहीं एलिमिनेशन जैसे टास्क में मुझे घर से बाहर भेजने के लिए शिद्दत से कोशिश कर रही थी. जो (अरमान मलिक) मेरी बॉडी शेमिंग कर रहा था, वो भी उसके साथ मिलकर मेरी बॉडी शेमिंग कर रही थीं. उनके इस धोखे से मुझे दुख हुआ. अब शायद वो मुझे बाहर मिलें, तब मैं उन्हें गले से भी लगा लूंगी. लेकिन तब मैं बहुत ज्यादा दुखी थी और इसलिए मैंने उन्हें नजरअंदाज करना सही समझा. हालांकि मैं अब भी बोलूंगी कि शिवानी दिल की साफ हैं, लेकिन कभी-कभी उन्हें बिलकुल भी समझ में नहीं आता कि दूसरों के साथ मिलकर वो क्या गलती कर रही हैं. अगर वो मेरी दोस्त नहीं होतीं तो मुझे उनकी बातों का बिलकुल भी बुरा नहीं लगता.”

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