8 अक्टूबर… भारतीय वायुसेना दिवस… यह दिन केवल सैन्य शक्ति का नहीं, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है. इस बार की थीम ‘सशक्त भारत, सक्षम सेना’ बिल्कुल सटीक है, क्योंकि देश की रक्षा शक्ति में अब भारतीय तकनीक और स्वदेशी फाइटर जेट की ताकत शामिल हो चुकी है. इस परिवर्तन के केंद्र में है कानपुर, जहां की पैराशूट फैक्ट्री, एयरफोर्स स्टेशन और आईआईटी ने मिलकर वायुसेना को नई दिशा दी है.
कानपुर की ऑर्डिनेंस पैराशूट फैक्ट्री (OPF) भारतीय वायुसेना की सबसे अहम तकनीकी इकाइयों में से एक है. यह न केवल भारत, बल्कि पूरे एशिया की इकलौती पैराशूट फैक्ट्री है, जो भारतीय फाइटर जेट्स के लिए उच्च गुणवत्ता वाले पैराशूट बनाती है. यह फैक्ट्री वायुसेना के सात प्रमुख फाइटर विमानों- सुखोई-30, तेजस, मिग-21, मिग-29, मिराज-2000, हॉक और जागुआर के लिए पैराशूट बनाती है. जब कोई फाइटर जेट तेज रफ्तार से लैंड करता है, तो ब्रेक पैराशूट खुलकर हवा के दबाव से उसकी रफ्तार को नियंत्रित करता है. इस तकनीक से विमान सुरक्षित रुक जाता है और किसी हादसे की आशंका नहीं रहती.
पायलट की सुरक्षा के लिए जीवनरक्षक पैराशूट
कानपुर की ऑर्डिनेंस पैराशूट फैक्ट्री ही ज्यादातर लड़ाकू विमानों के लिए पैराशूट बनाती है, जो किसी आपात स्थिति में फाइटर पायलट की जान बचाने में सबसे बड़ा सहारा होता है. मिग-29 के पायलटों के लिए PSU-36 पैराशूट, सुखोई-30 के लिए विशेष पायलट पैराशूट और तेजस एमके-1 के लिए एयरक्रू चेस्ट पैराशूट यहीं बनाए जाते हैं. इसके अलावा सैनिकों और भारी सामग्री को दुर्गम इलाकों में उतारने के लिए हैवी ड्रॉप पैराशूट सिस्टम और एएन-32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट पैराशूट सिस्टम भी इसी फैक्ट्री से तैयार होते हैं.
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