Jagannath Rath Yatra 2023: जगन्नाथ रथयात्रा आज से शुरू, रथयात्रा से शुरू हुआ काशी का 221 साल पुराना लक्खा मेला, 3 दिन उमड़ेंगे लाखों श्रद्धालु

Varanasi News: काशी में लक्खा मेले की शुरुआत हो चुकी है। पहला लक्खा मेला रथयात्रा का मेला आज से शुरू हो गया है। यह मेला अगले 3 दिन तक चलेगा।
 
Jagannath Rath Yatra 2023: जगन्नाथ रथयात्रा आज से शुरू, रथयात्रा से शुरू हुआ काशी का 221 साल पुराना लक्खा मेला, 3 दिन उमड़ेंगे लाखों श्रद्धालु

Varanasi News: काशी में लक्खा मेले की शुरुआत हो चुकी है। पहला लक्खा मेला रथयात्रा का मेला आज से शुरू हो गया है। यह मेला अगले 3 दिन तक चलेगा।

देश भर, विशेषतौर पर पूर्वांचल और बिहार के श्रद्धालुओं का तांता लगा रहेगा। इस मेले में हर दिन एक लाख से ज्यादा लोग आते हैं। यह मेला 221 साल से लगातार जारी है। बीच में कोविड की वजह से दो साल का गैप हुआ था।


आज परंपरागत तरीके से बेनी के बगीचे में आधी रात भगवान जगन्नाथ, भाई बलदाऊ और बहन सुभद्रा की मंगला आरती की गई। इसके बाद भगवान जगन्नाथ, बलदाऊ और सुभद्रा की प्रतिमा को रथ पर विराजमान किया गया। यहां से रथयात्रा मेले की आधिकारिक शुरुआत हो गई। वाराणसी में मेले के चलते 4 दिन के लिए 20 से 23 जून तक रूट डायवर्जन लागू कर दिया गया है।


क्या होता है लक्खा मेला?

काशी में कहावत है ‘सात वार नौ त्यौहार’, यानी सप्ताह में दिन तो 7 ही होते हैं, मगर उनमें 9 त्यौहार पड़ते हैं। बनारस मस्ती और आनंद वाला नगर माना जाता है। इसी के चलते बनारसियों ने त्योहारों की शुरुआत कराई। वाराणसी में आषाढ़ से कार्तिक महीने के बीच कई पारंपरिक मेलों का आयोजन होता है। जबसे इन मेलों की शुरुआत हुई है तब से करीब 1 लाख श्रद्धालु इस उत्सव में शामिल होते हैं। इसमें देश-विदेश के भी श्रद्धालु समाहित हैं। काशी में लक्खा मेलों की शुरुआत रथयात्रा मेले से होती है। इसके बाद सोरहिया मेला, लोलार्क षष्ठी, नाटीइमली का भरत मिलाप, चेतगंज की नक्कटैया और तुलसी घाट की नाग नथैया के साथ ही कार्तिक पूर्णिमा की देव दीपावली तक चलती है।

रथयात्रा मेले के दौरान नृत्य करतीं महिलाएं।

रथयात्रा मेले के दौरान नृत्य करतीं महिलाएं।

कल निकली थी डोली यात्रा

आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा पर वाराणसी के अस्सी स्थित भगवान जगन्नाथ की आज मंगला आरती के बाद भव्य डोली यात्रा निकाली गई थी। डमरू की निनाद और शंख की ध्वनि के साथ काशी की गलियां गूंज उठीं थी। इस डोली यात्रा में भगवान जगन्नाथ, भाई बलदाऊ और बहन सुभद्रा पर गुलाब की पंखुड़ियां बरसाईं गईं।

हर ओर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ था। लोग स्वयं डमरू और ढोल बजाकर नाचते-गाते डोली यात्रा पर निकले। इस डोली में भगवान जगन्नाथ के साथ ही बड़े भाई बलदाऊ और बहन सुभद्रा का भव्य श्रृंगार किया गया था। भगवान की डोली और भक्तों की टोली अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर से नवाबगंज, कश्मीरी गंज, शंकुलधारा, बैजनत्था मंदिर से रथयात्रा स्थित बेनी का बगीचा पहुंचे थे।

रथयात्रा मेले में उमड़े श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ को भोग चढ़े प्रसाद ग्रहण किया।

रूट डायवर्जन लागू

रथयात्रा मेले के मद्देनजर 20 से 23 जून तक रूट डायवर्जन की व्यवस्था कर दी गई है।

परसों खुले थे जगन्नाथ जी के पट

इससे पहले रविवार को अस्सी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर के पट रविवार को ही खुल गए थे। ट्रस्ट जगन्नाथजी के सचिव आलोक शापुरी ने बताया कि 15 दिन की बीमारी और बेड रेस्ट के बाद भगवान फिर से भक्तों को दर्शन दे रहे थे। रविवार 18 जून को अस्सी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में विराजमान प्रभु जगन्नाथ, बड़े भाई बलदाऊ और बहन सुभद्रा का भव्य श्रृंगार किया किया गया था।

1802 में शुरू हुआ यह मेला

1802 में शुरू हुए रथयात्रा मेले का यह 221वां वर्ष है। जगन्नाथ पुरी को छोड़कर आए मुख्य पुजारी तेजोनिधि ब्रह्मचारी ने 1790 में काशी में जगन्नाथ मंदिर का निर्माण करवाया। इसके 12 साल बाद रथ यात्रा मेले की शुरुआत कराई थी। आगे चलकर यहीं पर उन्होंने समाधि भी ले ली थी। जगन्नाथ मंदिर का निर्माण 1790 में कराया गया था।

पुरी और काशी में रथयात्रा और डोली यात्रा का अंतर है

काशी में भगवान जगन्नाथ के साथ बड़े भाई बलदाऊ और बहन सुभद्रा को डोली में बैठाकर यात्रा निकाली जाती है। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष दीपक शापुरी ने बताया कि काशी और पुरी की रथयात्रा में एक ही अंतर है। वाराणसी में रथ की जगह पर भगवान की यात्रा डोली पर निकलती है। जबकि पुरी में रथ पर।

क्यों बीमार पड़ते हैं भगवान जगन्नाथ?

मंदिर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष शैलेश शापुरी ने बताया कि मई की भीषण गर्मी से भगवान जगन्नाथ की काष्ठ प्रतिमा पर भक्तजन खूब जलाभिषेक करते हैं। इससे भगवान बीमार पड़ जाते हैं। इसके बाद डॉक्टर 15 दिन का बेड रेस्ट के लिए सलाह देते हैं।

आषाढ़ अमावस्या तक वे आराम करते हैं। बीच-बीच में भक्त बंद मंदिर के बाहर से ही भगवान को काढ़े का भोग कराते हैं। भगवान जगन्नाथ 4 जून को बीमार पड़े थे। 18 जून को वे स्वस्थ हो गए थे।